Monday, September 8, 2008

भ्रष्टाचार बनाम RTI

शाम को नीचे घूमते हुए माथुर साहब से टकरा गया ... इस मुलाकत को टकरा गया इसलिये लिखा क्योंकि आम तौर पर कोई उनसे सहज भेंट या मुलाकात के लिये तैयार नहीं होता है और जब कभी कोई उनसे टकरा जाये तो पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाता है दरअसल माथुर साहब का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा है ... अब जब माथुर साहब मिल ही गये तो उनकी बातें भी सुननी पड़ेगी ..... मैं उनसे मुखातिब होकर कुछ बोल पाता इससे पहले वो ही बोल पड़े ॥ “गुप्ता जी, इस देश में तो दिन पे दिन रहना मुश्किल ही होता जा रहा है..मैने तो इसीलिये अपने दोनो बेटे विदेश में सैटिल कर दिये हैं, और बड़े बेटे को तो न्यूजीलैंड की नागरिकता भी मिलने वाली है ...लेकिन इस देश का तो भगवान ही मालिक है” …...मैने उन्हे बीच में ही टोक कर पूछ लिया ... “अरे हुआ क्या माथुर साहब क्यों कोस रहे हैं इस देश को”..... “होना क्या है अब आप ही बताइये, क्या कोई महकमा बचा है जहां भ्रष्टाचार अपनी जड़ें न जमा चुका हो, है कोई ऐसा काम जो घूस के बिना हो जाता हो ...... इन इमारतों को ही ले लीजिये क्या आपको नहीं लगता कि इनके बनाने में बिल्डर ने नियमों और निर्देशों की धज़्जियां उड़ाई हैं ..... बाहर की टूटी सड़क ही देखिये, और आपको क्या लगता है कि इसके बारे में जीडीए को कुछ नहीं पता होगा … सबकी मिली भगत है” ..... मुझे लगा कि माथुर साहब की बातों में कुछ तो दम है ... लेकिन इसका मतलब देश छोड़ देना तो बिल्कुल नहीं है ... मात्र व्यवस्था को कोसते रहने से कुछ नहीं होगा ... व्यवस्था को बदलने की ज़रूरत है ... ठीक है कि भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं लेकिन उससे लड़ने के रास्ते खत्म हो गयें हों ऐसा बिल्कुल नहीं ... ज़रूरत जागरूकता बढ़ाने की है ... मैने माथुर साहब से पूछा, क्या आरटीआई (RTI) के बारे सुना है आपने .. बोले हां सुना तो है लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं जानता इसके बारे में ... मुझे उनसे इसी तरह के उत्तर की अपेक्षा थी ... दरअसल हर छोटे बड़े काम को सुविधा शुल्क के नाम पर घूस देकर करा लेने वाले हम और आप ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं ... क्योकि हमें शार्ट कट की आदत पड़ गयी है... थोड़ा बहुत सुविधा शुल्क लगने के बाद अगर काम आसानी से हो जाए तो इसमें हम कोई बुराई नहीं समझते ... लेकिन भ्रष्टाचार के नाम पर देश और व्यवस्था को कोसने का भी कोई मौका हम नहीं चूकते ...
खैर मुझे भी आज मौका मिल गया था माथुर साहब को पकाने का, विस्तार से RTI के बारे में बताने लगा ... दरअसल मै उन्हे बताना चाहता था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने में RTI यानि सूचना का अधिकार आम आदमी के हाथ में एक बड़े हथियार की तरह है और शायद इसीलिये लागू होने के तीन साल से भी कम समय में इसने ख़ासी सफलता अर्जित की है ... हालत ये है कि आज RTI के नाम पर नौकरशाह एक अजीब से दवाब में आ जाते हैं ... CIC के पास इतनी शिकायतें जाने लगी हैं कि उसके सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर विचार हो रहा है... सरकारी महकमों में RTI नाम का एक अजीब सा डर व्याप्त है.... लोग ग़लत काम करने से पहले डरते हैं कि कहीं किसी ने इसकी सूचना मांग ली तो पूरी पोल खुल जायेगी....
दरअसल सूचना का अधिकार वो अधिकार है जिसके अंतर्गत आप किसी भी सरकारी महकमें से तमाम तरह के सवाल पूंछ सकते हैं ....तमाम तरह की जानकारियां हासिल कर सकते हैं और अगर कहीं भ्रष्टाचार का सामना करना पड़े तो इन जानकारियों को उसके खिलाफ पुख्ता सबूत के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं ... मैने देखा माथुर साहब बड़े ही ध्यान से मुझे सुन रहे थे ... बीच बीच में वो मुझसे कुछ सवाल भी करते जाते जिनके जवाब देकर मै उन्हे संतुष्ट भी कर रहा था .... उत्साह और हैरत से लबरेज माथुर साहब बोले ...“वाह गुप्ता जी ये तो किसी जादू की छड़ी से कम नहीं है”.... मैने मुस्करा कर कहा .... बिल्कुल ठीक माथुर साहब, और हां, RTI के अंतर्गत कोई जानकारी हासिल करना भी बेहद आसान है ...बस एक सादे पन्ने पर एप्लीकेशन लिखो, क्या जानकारी चाहते हो उसे बिन्दुवार प्रश्नो के रूप में इस एप्लीकेशन पर लिख दो ... और 10 रुपये की मामूली सी फीस के साथ संबन्धित विभाग के जन सूचना अधिकारी के पास जमा करा दो .... बस 30 दिन के भीतर आपको मांगी गयीं सूचनाएं मिल जाएंगी ... माथुर साहब काफी खुश थे ... राहत के भाव जो उनके चेहरे पर नज़र आ रहे थे उससे साफ था कि कम से कम एक बार ज़रूर वो RTI का इस्तेमाल करेंगे .. और मै भी संतुष्ट था क्योंकि माथुर साहब जो किसी के सामने चुप नहीं होते आज मैने उन्हे सुनने पर मजबूर कर दिया था ...

7 comments:

तरूश्री शर्मा said...

10 रूपए में कितनी सूचनाएं मिल पा रही हैं... और समय को किस कीमत पर आंकेंगे। कानून बन जाए लेकिन उनका सही ढंग से इम्प्लीमेंटेशन हो तो कुछ बात बने। आम आदमी तो बेचारा चक्कर काट काट के ही हार मान ले कि रहने दो दस रूपए भी और सूचनाएं भी।

कविता वाचक्नवी said...

चिट्ठे का स्वागत है. लेखन के लिए शुभकामनाएँ. खूब लिखें, अच्छा लिखें.

शहरोज़ said...

ब्लॉग की दुनिया में आपका हार्दिक अभिनन्दन.
आप के रचनात्मक प्रयास के हम कायल हुए.
जोर-कलम और ज्यादा.
कभी फ़ुर्सत मिले तो इस तरफ भी ज़रूर आयें.
http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/
http://hamzabaan.blogspot.com/

masaurhi said...

gupta sir aapgn mathur saheb ko rti ke baare mae thik tareke se samjha diya,lekin aapne unse puccha ki unko bhi jaha jugad laga woh rishwat lene se baaz aaya honge,eak jimmedar citizen ke nate unka farz nahi banta ki corruption ke khilaf awaaz buland kare.mae bhi ddnews mae posted hu,aur rti ke tahat jaanane ka haq program dekhta hu.

shama said...

chitthaa jagatme swagat ho...aur zyada padhna chahungee...shuruaat to behad achhee hai..mai khud koyee lekhika nahee...bas apnee zindagee aaplogon ke saath baaantane chalee aayee...!

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत सटीक लिखा है आपने हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है निरंतरता की चाहत है समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी दस्तक दें

kumar@papam.in said...

Bahot hi accha hai. Kaafi positive outlook hai aapka. keep it up.